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व्यापारी की शिकायत पर जीएसटी विभाग के अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज

अधिकारी हो चुका चार्जशीट, व्यापारी को अपनी फर्म बंद करने पर होना पड़ा मजबूर

Satyakhabarindia

सत्य खबर हरियाणा

Crime News : थाना शहर जींद पुलिस ने एक व्यापारी की शिकायत पर जींद में तैनात जीएसटी अधिकारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इससे पहले इस मामले में जिला उपायुक्त के निर्देशों पर अतिरिक्त उपायुक्त ने जांच की थी जिसमें जीएसटी अधिकारी राजेश गुप्ता को दोषी पाया गया था।
शहर के पुराने हांसी रोड़ पर स्थित भावना फीड की मलिक ललित लूथरा ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि 9 जून 2025 को एक ट्रक ट्राला सोयाबीन पशुचारा लेकर उनकी फर्म भावना फीड पर पहुंचा जिसके माल के पूरे कागजात मौके पर मोजूद थे। व्यवस्थित तरीके से जैसे ही उपरोक्त माल को उतारने की तैयारी की जा रही थी तब अचानक राजेश गुप्ता बिना पूर्व सूचना, बिना अधिकार और किसी नोटिस के बिना गोदाम पर पहुंचा। राजेश गुप्ता को सभी कागजात दिखा दिये गए लेकिन राजेश गुप्ता ने कहा कि आपकी फर्म के उपर जुर्माना बनता है।

महिला का कहना है कि जब यह घटना हुई उस समय वह मौके पर मौजूद नहीं थे। उनका बेटा दफ्तर में बैठा था और उनके बेटे ने जब यह कहा कि उनके पिता 20 मिनट में आ जाएंगे आप तब तक इंतजार कर लो तो राजेश गुप्ता ने गाली गलोज किया और उनके बेटे को धक्का मारा। राजेश गुप्ता ने स्टाफ और उनके बेटे को सरकारी कार्य में बाधा डालने के केस में फसाने की धमकी विधि और वह माल एवं ट्रक को अपने कब्जे में लेकर चले गए। इस दौरान उन्होंने किसी भी प्रकार के नियम और कायदे कानूनों का पालन नहीं किया।
जब मामले की जानकारी के लिए वह जीएसटी विभाग कार्यालय में गए तो यह बताया गया कि लूथरा फीडस पर जुर्माना लगाया गया है जो कि उसी परिसर में स्थित उनकी अन्य एक फर्म है।

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शिकायत में कहा गया है कि अगले दिन वह उपायुक्त से मिले। उपायुक्त ने डीईटीसी सार्थक कोहली को बुलाकर इस मामले में जांच करने को कहा। सार्थक कोहली ने 2 ईटीओ सुब्रत शर्मा और देवेश साहू की की कमेटी गठित की। दोनों ने पाया कि हमारी तरफ से ऐसी कोई ग़लती नहीं हुई है, जिसकी वजह से जुर्माना लगाया जा सके एवं कार्यवाही करने के दौरान कागजी कार्यवाही सही नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट पेश करने के दौरान डीईटीसी सार्थक कोहली और सुव्रत शर्मा और द्विवेश साहू ने राजेश गुप्ता के लिए भाई भतीजावाद करते हुए राजेश गुप्ता की कार्यवाही को जायज ठहराया। इस घटना के पांचवे दिन विभाग द्वारा बताया गया कि एक लाख 23 हजार रुपए का जुर्माना हर हाल में भरना पड़ेगा। उन्होंने गाड़ी मालिक एंड ट्रांसपोर्टर के दबाव में एवं गाड़ी में लदा माल बचाने की मजबूरी में राजेश गुप्ता द्वारा लगाई गई जुर्माना राशि विरोध स्वरूप भर दी। इसके बाद गाड़ी छोड़ते समय पर भी राजेश गुप्ता द्वारा जरूरी कागजी कार्यवाही उचित तरीके से नहीं की गई। जब उन्हें गाड़ी का पिछला हिस्सा खाली नजर आया तो उन्होंने राजेश गुप्ता को गाड़ी का वजन करवाकर देने की प्रार्थना की, जिस पर राजेश गुप्ता आग-बबूला हो गया और मौके से भाग गया। जब उन्होंने गाड़ी का वजन करवाया तो पाया कि साढ़े दस टन माल कम है। जिसकी कीमत लगभग साढ़े 3 लाख रुपए है।

क्या मिला एडीसी को जांच में

शिकायतकर्ता के अनुसार इस मामले में जींद के एडीसी विवेक आर्य ने जांच की थी। उन्होंने 45 दिनों की जांच के दौरान यह विश्लेषण किया कि राजेश गुप्ता यह सत्यापित नहीं कर पाए कि माल गलत जगह, गलत पार्टी के द्वारा बिना बिल के उतारा जा रहा था। अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा साफ तौर पर कहा गया कि राजेश गुप्ता द्वारा विभाग के नियमानुसार कार्यवाही न करके मनमाने व लापरवाही करके व्यापारी पर कार्यवाही की गई है। उन्होंने जीएसटी विभाग के उच्च अधिकारियों को राजेश गुप्ता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की सिफारिश की है।

मामला पहुंचा था हाईकोर्ट

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यह मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट भी पहुंचा था। हाईकोर्ट ने जींद डीसी को आदेश दिया कि मामले की सुनवाई कर के उच्च अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के बारे में स्पष्ट किया जाए। उपायुक्त ने जीएसटी विभाग के उच्च अधिकारी को तलब कर पूछा कि आपने पकड़ी हुई गाड़ी इतनी दूर एक गैर अधिगृहित परिसर में ही क्यों खड़ी की? तब डीईटीसी ने कहां की वह गाड़ियों को रैंडमली खड़ी करते हैं। इस पर शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस स्थान पर गाड़ी खड़ी की गई वह एक प्राइवेट स्थान है और उनके परम से 2 किलोमीटर दूर है जबकि उनके फार्म के पास कई ऐसे सरकारी परिसर हैं जहां पर चौकीदार भी 24 घंटे रहते हैं।

विभाग ने किया चार्जशीट

इस मामले की शिकायत उन्होंने जीएसटी विभाग के उच्च अधिकारियों को पंचकूला सिर्फ मुख्यालय में भी थी तब 2 महीने की जांच के बाद विभाग द्वारा राजेश गुप्ता को चार्जशीट किया गया था। उनका कहना है कि उन्हें केवल व्यापारी होने के कारण प्रताड़ित किया गया। उनसे जबरन जुर्माना राशि वसूली गई और उनके लगभग 10.5 टन माल चोरी हुआ, जिसकी लगभग साढ़े तीन से चार लाख रुपये है। इससे आहत होकर उन्होंने अपनी फर्म को बंद ही कर दिया।

पुलिस की कार्रवाई

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इस मामले में थाना शहर जींद पुलिस ने जीएसटी विभाग के एईटीओ राजेश गुप्ता के खिलाफ बीएनएस की धारा 319 (2), 329 (3), 98 351(3), 352 के अंतर्गत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यहां बता दें कि शहर के व्यापारी जीएसटी विभाग के अधिकारियों से खासे प्रताड़ित हैं। पिछले दिनों शहर के एक व्यापारी ने जीएसटी विभाग के अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़वाने का भी काम किया था।

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